
मुंबई: भीमा कोरेगांव विजय स्तंभ के विकास के लिए सरकार कई बार निधि की घोषणा करती रही है, लेकिन भीमा कोरेगांव विजय स्तंभ के अतिक्रमण और भूमि स्वामित्व से संबंधित मामला न्यायालय में लंबित होने के कारण किसी भी प्रकार का विकास कार्य नहीं किया जा सकता। इसलिए सबसे पहले न्यायालय का मुकदमा जीतना ही हम सभी की पहली और सामूहिक जिम्मेदारी है।
भीमा कोरेगांव विजय स्तंभ अतिक्रमण व भूमि स्वामित्व का यह प्रशासनिक और न्यायालयीन संघर्ष प्रत्येक गाँव, शहर, तहसील, जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर जनजागृति करने के उद्देश्य से तथा यह आंदोलन समाजोन्मुख बने इसलिए जनजागरण अभियान चलाया जाने वाला है। न्यायालयीन प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़े और जल्द से जल्द निर्णय आए, इसके लिए सभी लोगों को इस संघर्ष में सहभागी होने का आवाहन किया गया है।
इसी उद्देश्य से कोरेगांव भीमा विजय स्तंभ बचाव समिति की स्थापना की गई है। कोरेगांव भीमा जयस्तंभ बचाव समिति के अध्यक्ष दादाभाऊ अभंग के मार्गदर्शन में, मुख्य समन्वयक अतिशभाई खराटे ने कोरेगांव भीमा जयस्तंभ बचाव समिति के सिल्वास जिला अध्यक्ष (दादरा-नगर हवेली, दमन-दीव केंद्रशासित प्रदेश) पद पर आयु. नरेंद्र धारगावे की नियुक्ति की है। वे कई वर्षों से आंबेडकरी आंदोलन में सक्रिय रूप से कार्यरत हैं। सामाजिक, धार्मिक तथा शैक्षणिक क्षेत्रों में उनका महत्वपूर्ण योगदान है। धार्मिक कार्यों में वे अग्रणी हैं और धम्म का प्रसार-प्रचार कर रहे हैं। विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से वे समाज में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के विचारों का प्रसार कर रहे हैं।
आयु. नरेंद्र धारगावे अनेक सामाजिक संगठनों में पदाधिकारी के रूप में जनता की सेवा कर रहे हैं। भीमा कोरेगांव विजय स्तंभ अतिक्रमण से संबंधित न्यायालयीन संघर्ष में वे लंबे समय से सहभागी हैं। इस ऐतिहासिक कानूनी लड़ाई में आयु. नरेंद्र धारगावे जनजागृति का कार्य तन, मन और अपने समर्पण के साथ करेंगे, ऐसी अपेक्षा व्यक्त की गई है।
उनके आगामी कार्यों के लिए हार्दिक शुभकामनाएँ।